मोदी के 12 वर्ष पूर्ण, धामी ने बताया भारत के आत्मविश्वास और आत्मगौरव का स्वर्णिम दौर
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*”प्रधानमंत्री के रूप में आदरणीय श्री नरेंद्र मोदी जी के गौरवपूर्ण बारह वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी जी की ओर से शुभकामना-पत्र”*
*प्रधानमंत्री जी को पत्र*
श्रद्धेय प्रधानमंत्री जी,
सादर प्रणाम।
प्रधानमंत्री के रूप में आपके सफल नेतृत्व के बारह वर्ष पूर्ण होने तथा स्वतंत्र भारत के इतिहास में सर्वाधिक अवधि तक निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में सेवा देने के इस ऐतिहासिक अवसर पर देवभूमि उत्तराखण्ड की समस्त जनता की ओर से मैं, आपको हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ प्रेषित करता हूँ।
यह केवल बारह वर्षों का कालखंड नहीं है, बल्कि भारत के पुनर्जागरण, आत्मविश्वास, सांस्कृतिक पुनर्स्थापना, सुशासन और वैश्विक प्रतिष्ठा के अभूतपूर्व उत्कर्ष का एक स्वर्णिम अध्याय है। आपके दूरदर्शी, निर्णायक और जनोन्मुखी नेतृत्व में भारत ने विकास, राष्ट्रीय सुरक्षा, सांस्कृतिक गौरव और जनकल्याण के क्षेत्र में जो ऐतिहासिक उपलब्धियाँ अर्जित की हैं, वे आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेंगी।
आदरणीय प्रधानमंत्री जी, आपने सदैव अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का संकल्प लिया और उसे धरातल पर उतारकर दिखाया। प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत, उज्ज्वला योजना, जनधन योजना, हर घर जल, स्वच्छ भारत मिशन, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि तथा गरीब कल्याण अन्न योजना जैसी अनेक योजनाओं ने करोड़ों देशवासियों के जीवन में आशा, सम्मान और आत्मविश्वास का संचार किया है।
आपके नेतृत्व में भारत ने केवल आर्थिक प्रगति ही नहीं की, बल्कि आत्मनिर्भरता की दिशा में भी ऐतिहासिक कदम बढ़ाए हैं। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के माध्यम से “एक राष्ट्र-एक कर” की अवधारणा को साकार करना, डिजिटल इंडिया अभियान और यूपीआई के जरिए भारत को विश्व का अग्रणी डिजिटल भुगतान तंत्र बनाना, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का क्रियान्वयन, आत्मनिर्भर भारत अभियान तथा रक्षा उत्पादन में अभूतपूर्व वृद्धि आपके दूरदर्शी नेतृत्व के सशक्त प्रमाण हैं।
स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत, मेक इन इंडिया की सफलता तथा अंतरिक्ष और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता ने भारत की सामरिक शक्ति को नई ऊँचाइयाँ प्रदान की हैं।
कोविड-19 जैसी वैश्विक महामारी के कठिन समय में भारत ने न केवल विश्व का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान संचालित किया, बल्कि स्वदेशी वैक्सीन निर्माण के माध्यम से मानवता की सेवा का अनुपम उदाहरण भी प्रस्तुत किया। “वैक्सीन मैत्री” के माध्यम से भारत ने विश्व समुदाय के प्रति अपनी जिम्मेदारी का परिचय दिया।
राष्ट्र की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए आपने हमारे वीर जवानों के सम्मान, सुविधाओं और मनोबल को नई ऊँचाइयाँ प्रदान कीं। “वन रैंक-वन पेंशन” जैसी दशकों पुरानी मांग को पूरा कर आपने सैनिकों और पूर्व सैनिकों के प्रति राष्ट्र की कृतज्ञता को अभिव्यक्त किया। सीमाओं पर सशक्त भारत और आतंकवाद के विरुद्ध अपनाई गई निर्णायक नीति ने देशवासियों के विश्वास को और अधिक मजबूत किया है।
आदरणीय प्रधानमंत्री जी, आपने भारत की प्राचीन सांस्कृतिक चेतना को पुनः जागृत करने का जो कार्य किया है, वह सदियों तक स्मरण किया जाएगा। अयोध्या में प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर का निर्माण, काशी विश्वनाथ धाम, महाकाल लोक तथा केदारनाथ धाम का पुनर्निर्माण केवल निर्माण कार्य नहीं हैं, बल्कि भारत की सनातन आत्मा के पुनर्जागरण के प्रतीक हैं।
अनुच्छेद-370 और 35-ए का हटना, तीन तलाक जैसी कुप्रथा से मुस्लिम महिलाओं को मुक्ति दिलाना, नागरिकता संशोधन अधिनियम का लागू होना तथा नारी शक्ति वंदन अधिनियम जैसे ऐतिहासिक निर्णय आपके साहसिक और दूरदर्शी नेतृत्व की पहचान हैं।
जी-20 की सफल अध्यक्षता, चंद्रयान-3 की ऐतिहासिक सफलता, “एक पृथ्वी-एक परिवार-एक भविष्य” के संदेश तथा विकसित भारत के संकल्प ने वैश्विक मंच पर भारत के सम्मान और विश्वास को अभूतपूर्व ऊँचाई प्रदान की है। आज विश्व भारत को केवल एक विशाल जनसंख्या वाले देश के रूप में नहीं, बल्कि मानवता के कल्याण के लिए समर्पित एक विश्वसनीय शक्ति के रूप में देखता है। “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भारतीय भावना को आपने नई ऊर्जा और नई प्रतिष्ठा के साथ विश्व समुदाय के समक्ष प्रस्तुत किया है।
आदरणीय प्रधानमंत्री जी, उत्तराखण्ड के प्रति आपका आत्मीय लगाव हम सभी के लिए सदैव प्रेरणा का विषय रहा है। देवभूमि के प्रति आपका विशेष स्नेह केवल शब्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि आपके प्रत्येक निर्णय और प्रत्येक पहल में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
केदारनाथ धाम के पुनर्निर्माण से लेकर बदरीनाथ धाम मास्टर प्लान, चारधाम ऑल वेदर रोड परियोजना, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना, दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे, हेली सेवाओं के विस्तार तथा सीमांत क्षेत्रों के विकास के माध्यम से आपने उत्तराखण्ड के विकास को नई गति प्रदान की है।
आपके ही नेतृत्व में सोनप्रयाग-केदारनाथ तथा गोविन्दघाट- हेमकुण्ड साहिब रोपवे परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गई तथा इनके निर्माण कार्य का शुभारम्भ हुआ। यह केवल आधारभूत संरचना का विस्तार नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को सुविधा और सुरक्षा से जोड़ने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है।
आपके नेतृत्व में उत्तराखण्ड को वंदे भारत एक्सप्रेस की सौगात मिली, एम्स ऋषिकेश को सुदृढ़ किया गया तथा किच्छा में एम्स के सैटेलाइट सेंटर की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हुआ।
लखवाड़ बहुउद्देशीय परियोजना, सौंग बांध तथा व्यासी परियोजना को गति मिली और रेल व सड़क संपर्क के क्षेत्र में रिकॉर्ड निवेश हुआ।
मैं, विशेष रूप से जमरानी बहुउद्देशीय बांध परियोजना का उल्लेख करना चाहूँगा, जो लगभग पाँच दशकों तक विभिन्न कारणों से लंबित रही। आपके निर्णायक नेतृत्व में इस महत्वपूर्ण परियोजना को नई गति मिली और इसके क्रियान्वयन का मार्ग प्रशस्त हुआ। इसके पूर्ण होने के पश्चात राज्य के तराई क्षेत्र की भावी पेयजल एवं सिंचाई आवश्यकताओं की पूर्ति सुनिश्चित होगी और लाखों लोगों को इसका लाभ प्राप्त होगा। आने वाली पीढ़ियाँ भी इस दूरदर्शी निर्णय के लिए सदैव आपकी ऋणी रहेंगी।
आदरणीय प्रधानमंत्री जी, चाहे बाबा केदार की पुण्य धरा से “21वीं सदी का तीसरा दशक, उत्तराखण्ड का दशक होगा” कहकर राज्यवासियों का उत्साहवर्धन करना हो, सीमांत गाँव माणा को “देश का प्रथम गाँव” घोषित कर सीमांत क्षेत्रों को नई पहचान देना हो, “वेड इन उत्तराखण्ड” का संदेश देकर युवाओं और उद्यमियों में नया विश्वास जगाना हो, आदि कैलाश और जागेश्वर धाम की यात्रा करना हो, राष्ट्रीय खेलों के अवसर पर देवभूमि को “खेलभूमि” के रूप में नई पहचान प्रदान करना हो अथवा हर्षिल-मुखबा की पुण्यभूमि से शीतकालीन पर्यटन को नई दिशा देने का आह्वान करना हो, आपका देवभूमि में प्रत्येक आगमन उत्तराखण्ड के लिए सदैव शुभ, प्रेरणादायी और कल्याणकारी सिद्ध हुआ है।
जब-जब प्राकृतिक आपदाओं ने उत्तराखण्ड को चुनौती दी, तब-तब आपने एक अभिभावक की भाँति राज्य के साथ खड़े होकर उसका संबल बढ़ाया। आपके मार्गदर्शन और सहयोग के कारण आज उत्तराखण्ड विकास, पर्यटन, निवेश, बुनियादी ढाँचे और सांस्कृतिक पुनर्जागरण के नए आयाम स्थापित कर रहा है।
आदरणीय प्रधानमंत्री जी, उत्तराखण्ड की जनता सदैव यह अनुभव करती है कि आपने इस देवभूमि को केवल एक राज्य के रूप में नहीं, बल्कि अपनी आत्मीय भूमि के रूप में अपनाया है। संभवतः आप स्वतंत्र भारत के ऐसे प्रधानमंत्री हैं, जिन्होंने उत्तराखण्ड की धरती पर सर्वाधिक बार आकर यहाँ के लोगों के साथ अपना स्नेह और अपनापन साझा किया है। यह आत्मीयता देवभूमि के प्रत्येक नागरिक के हृदय में आपके प्रति विशेष सम्मान और विश्वास का आधार है।
देवभूमि उत्तराखण्ड की जनता के लिए आप केवल देश के प्रधानमंत्री ही नहीं, बल्कि एक ऐसे आत्मीय अभिभावक हैं, जिनके स्नेह, मार्गदर्शन और संकल्प ने राज्य की आकांक्षाओं को नई ऊँचाइयाँ प्रदान की हैं।
हम सभी आपके स्वस्थ, दीर्घायु और यशस्वी जीवन की कामना करते हैं तथा विश्वास व्यक्त करते हैं कि आपके नेतृत्व में भारत अमृतकाल के इस दौर में विकसित राष्ट्र के अपने “विकल्प रहित संकल्प” को अवश्य प्राप्त करेगा और वर्ष 2047 तक विश्व के अग्रणी राष्ट्रों में अपना गौरवपूर्ण स्थान स्थापित करेगा।
अंत में, अपनी भावनाओं को इन पंक्तियों के माध्यम से व्यक्त करना चाहूँगा –
कुछ नाम समय के पन्नों पर लिखे नहीं जाते हैं,
वे राष्ट्र की धड़कन बनकर युगों-युगों तक गाए जाते हैं।
जब भी भारत के स्वर्णिम कल की चर्चा संसार करेगा,
आपका यशगान उसमें सदा अमर रहेगा।
आपका यशगान उसमें सदा अमर रहेगा।
सादर,
(पुष्कर सिंह धामी)
मुख्यमंत्री, उत्तराखण्ड
देवभूमि उत्तराखण्ड की समस्त जनता की ओर से

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